पटना : बिहार मे बिजली क कमी दूर करबा लेल आ माछ उत्पादन मे राज्य कए आत्मनिर्भर करबा लेल सरकार पोखरि मे माछ आ ऊपर सोलर प्लेट स बिजली उत्पादन करबा लेल प्रक्रिया शुरू क देलक अछि। गामक छोट-पैघ पोखरि मे बहुत जल्द माछ उत्पादन क संग संग बिजली उत्पादन सेहो देखबा लेल भेटत। पशु आ मत्स्य विभाग क अधिकारी क कहब अछि जे एकरा लेल बिहार स्टेट पॉवर होल्डिंग कंपनी आॅनलाइन टेंडर निकाललक अछि आ जल्द इ योजना देखबा लेल भेटत। एहि योजना कए लागू भेला स पोखरिक अधिकतावाला मिथिला मे सस्ता आ निर्बाध बिजली कसंग संग माछ क स्वाद सेहो भेटत। ओ कहला जे पोखरि क ऊपर अलग किस्म क पैघ- पैघ सोलर प्लेट लगाउल जाएत आ नीचा माछ पोसल जाएत। वर्तमान वित्त वर्ष मे 200 स बेसी पोखरिक चयन कैल जाएत जाहि स 250 मेगावाट बिजला उत्पादन क लक्ष्य राखल गेल अछि। एकटा अन्य अधिकारी क कहब अछि जे एहि स केवल बिजली या माछ क उत्पादन नहि बढत बल्कि पैघ संख्या मे स्वरोजगार सेहो भेटत। अगर इ योजना सफल भ जाइत अछि त भविष्य मे पुरान आ जीर्ण-शीर्ण पोखरि मे सेहो इ योजना लागू कैल जा सकत।
अधिकारी कहला जे टेंडर निकाबा स पूर्व सरकार एहि योजना पर काफी शोध केलक अछि। समस्तीपुर क एकटा पोखरि मे भेल शोध स इ स्पष्ट भ गेल अछि जे जलक ऊपर बिजली उत्पादन स नीचा माछ उत्पादन पर कोनो प्रतिकूल असर नहि पड़त। शोध मे इ कहल गेल जे माछ लेल आदर्श तापमान 26 डिग्री स 32 डिग्री सेल्सियस अछि। बिहार मे गर्मी क किछु दिन छोडि कए आमतौर पर जलवायु माछ पोसबा योग्य अछि। एहन स्थिति सौर ऊर्जा स बिजली उत्पादन क सेहो आदर्श कहल जा रहल अछि। एकटा अनुमान क अनुसार बिहार मे साल भरि मे 80 दिन सूरज क रोशनी कम होइत अछि मुदा शेष दिन पर्याप्त मात्रा मे सूरज क रोशनी भेटैत अछि। ताहि लेल एहि ठाम सौर ऊर्जा स बिजली आसानी स भ सकैत अछि।
मत्स्य निदेशालय कोलकाता क मत्स्य वैज्ञानिक स एहि संबंध मे शोध करेलाक बाद एहि योजना कए लागू करबाक फैसला लेलक अछि। राज्य क पशु आ मत्स्य संसाधन मंत्री गिरिराज सिंह कहला जे इ मॉडल अनोखा प्रयोग होएत। एहि स राज्य मे बिजली क कमी दूर करबा मे मदद भेटत, ओतही राज्य माछ उत्पादन मे आत्मनिर्भर भेलाक संगहि माछ क निर्यात करबाक स्थिति मे आबि जाएत। ओ कहला जे एखन बिहार मे प्रतिदिन 44 टन माछ क खपत अछि, मुदा राज्य मे माछ क उत्पादन 30 स 34 टनक बीच होइत अछि। बाकी मांग आंध्र प्रदेश स माछ मंगा पूरा कैल जाइत अछि। पटना क मत्स्य वैज्ञानिक सेहो कहैत छथि जे राज्य मे माछ क खपत बेसी अछि, मुदा पोखरि क कमी नहि रहबाक बावजूद माछ क उत्पादन क लक्ष्य हासिल नहि भ पाबि रहल अछि। कईटा पैघ पोखरि त ओहिना पडल अछि।
अधिकारी कहला जे टेंडर निकाबा स पूर्व सरकार एहि योजना पर काफी शोध केलक अछि। समस्तीपुर क एकटा पोखरि मे भेल शोध स इ स्पष्ट भ गेल अछि जे जलक ऊपर बिजली उत्पादन स नीचा माछ उत्पादन पर कोनो प्रतिकूल असर नहि पड़त। शोध मे इ कहल गेल जे माछ लेल आदर्श तापमान 26 डिग्री स 32 डिग्री सेल्सियस अछि। बिहार मे गर्मी क किछु दिन छोडि कए आमतौर पर जलवायु माछ पोसबा योग्य अछि। एहन स्थिति सौर ऊर्जा स बिजली उत्पादन क सेहो आदर्श कहल जा रहल अछि। एकटा अनुमान क अनुसार बिहार मे साल भरि मे 80 दिन सूरज क रोशनी कम होइत अछि मुदा शेष दिन पर्याप्त मात्रा मे सूरज क रोशनी भेटैत अछि। ताहि लेल एहि ठाम सौर ऊर्जा स बिजली आसानी स भ सकैत अछि।
मत्स्य निदेशालय कोलकाता क मत्स्य वैज्ञानिक स एहि संबंध मे शोध करेलाक बाद एहि योजना कए लागू करबाक फैसला लेलक अछि। राज्य क पशु आ मत्स्य संसाधन मंत्री गिरिराज सिंह कहला जे इ मॉडल अनोखा प्रयोग होएत। एहि स राज्य मे बिजली क कमी दूर करबा मे मदद भेटत, ओतही राज्य माछ उत्पादन मे आत्मनिर्भर भेलाक संगहि माछ क निर्यात करबाक स्थिति मे आबि जाएत। ओ कहला जे एखन बिहार मे प्रतिदिन 44 टन माछ क खपत अछि, मुदा राज्य मे माछ क उत्पादन 30 स 34 टनक बीच होइत अछि। बाकी मांग आंध्र प्रदेश स माछ मंगा पूरा कैल जाइत अछि। पटना क मत्स्य वैज्ञानिक सेहो कहैत छथि जे राज्य मे माछ क खपत बेसी अछि, मुदा पोखरि क कमी नहि रहबाक बावजूद माछ क उत्पादन क लक्ष्य हासिल नहि भ पाबि रहल अछि। कईटा पैघ पोखरि त ओहिना पडल अछि।
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